ಶ್ರೀ ಚೈತನ್ಯಮನೋಽಭೀಷ್ಟಂ ಸ್ಥಾಪಿತಂ ಯೇನ ಭೂತಲೇ।
ಸ್ವಯಂ ರೂಪಃ ಕದಾ ಮಹ್ಯಂ ದದಾತಿ ಸ್ವಪದಾನ್ತಿಕಮ್॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥