ಜೇ ಜೋನ ಮುಕ್ತಗೋಷ್ಟೀ ಆದರ ಕರೇ
ಆಮಾರ ದಯಾಲ ನಿತಾಈ ತಾಹಾಁರ ಘರೇ
(ಓ ತೋರ) ತರೇ ಭಕ್ತಿ ಭಾರೇ ದಕಲೇ ಪರೇ
ಉತ್ತರ ಸದಾ ಸಫಲ ಹ’ಬೇ॥4॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥