Warning: file_get_contents(http://ratannahn.pythonanywhere.com/transliterateIndic): Failed to open stream: HTTP request failed! HTTP/1.1 404 Not Found in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/vb/vbsong.php on line 53
प्रसाद सेवा (प्रसाद ग्रहण हेतु प्रार्थना) Hindi Prasada sevaya Prayers for honering Prasadam Prasada sevaya Prayers for honering Prasadam Srila Bhaktivinoda Thakura Shrila Bhaktivinoda Thakura 1 maha prasade govinde nama brahmani vaisnave svalpa pu वैष्णव आचार्यों के गीत एवं भजन | Bhajan & Aarti of Vaishnav Acharyas ISKCON songs
 
वैष्णव भजन  »  प्रसाद सेवा (प्रसाद ग्रहण हेतु प्रार्थना)
 
 
प्रसाद सेवा (प्रसाद ग्रहण हेतु प्रार्थना) 
श्रील भक्तिविनोद ठाकुर       
भाषा: हिन्दी | English | தமிழ் | ಕನ್ನಡ | മലയാളം | తెలుగు | ગુજરાતી | বাংলা | ଓଡ଼ିଆ | ਗੁਰਮੁਖੀ |
 
 
महाप्रसादे गोविन्दे, नाम-ब्रह्मणि वैष्णवे।
स्वल्पपुण्यवतां राजन्‌ विश्वासो नैव जायते॥1॥[महाभारत]
शरीर अविद्या जाल, जडेन्द्रिय ताहे काल,
जीवे फेले विषय-सागरे।
तारमध्ये जिह्वा अति, लोभमय सुदुर्मति,
ताके जेता कठिन संसारे॥2॥
 
 
कृष्ण बड दयामय, करिबारे जिह्वा जय,
स्वप्रसाद-अन्न दिलो भाई।
सेइ अन्नामृत पाओ, राधाकृष्ण-गुण गाओ,
प्रेमे डाक चैतन्य-निताई॥3॥
 
 
शब्दार्थ
(1) हे राजन! गोविन्द के महाप्रसाद, नाम तथा वैष्णव-भक्तों में स्वल्प पुण्यवालों को विश्वास नहीं होता। [महाभारत]
 
 
(2) शरीर अविद्या का जाल है, जडेन्द्रियाँ जीव की कट्‌टर शत्रु हैं क्योंकि वे जीव को भौतिक विषयों के भोग के इस सागर में फेंक देती हैं। इन इन्द्रियों में जिह्वा अत्यंत लोभी तथा दुर्मति है, संसार में इसको जीत पान बहुत कठिन है।
 
 
(3) भगवान्‌ कृष्ण बड़े दयालु हैं और उन्होंने जिह्वा को जीतने हेतु अपना प्रसादन्नन्न दिया है। अब कृपया उस अमृतमय प्रसाद को ग्रहण करो, श्रीश्रीराधाकृष्ण का गुणगान करो तथा प्रेम से चैतन्य निताई! पुकारो।
 
 
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥