वैष्णव भजन  »  दया कर मोरे निताइ
 
 
ଶ୍ରୀଲ କାନୁ ରାମଦାସ ଠାକୁର       
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ଦଯା କର ମୋରେ ନିତାଈ ଦଯା କର ମୋରେ।
ଅଗତିର ଗତି ନିତାଈ ସାଧୁଲୋକେ ବୋଲେ॥1॥
 
 
ଜଯ ପ୍ରେମଭକ୍ତି ଦାତା ପତାକା ତୋମାର।
ଉତ୍ତମ ଅଧମ କିଛୁ ନା କୈଲ ଵିଚାର॥2॥
 
 
ପ୍ରେମଦାନେ ଜଗଜୀଵେର ମନ କୈଲା ସୁଖୀ।
ତୁମି ଜଦି ଦଯାର ଠାକୁର ଆମି କେନେ ଦୁଃଖୀ॥3॥
 
 
କାନୁରାମ ଦାସେ ବୋଲେ କି ବଲିବ ଆମି।
ଏ ବଡ ଭରସା ମୋର କୁଲେର ଠାକୁର ତୁମି॥4॥
 
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
 
 
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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