|
| |
| |
ଶ୍ରୀମଦ ଭାଗଵତମ କଥା ସେ ପୂର୍ଵ ଉଚ୍ଚାରିତ ମଂତ୍ର  |
| भाषा: हिन्दी | English | தமிழ் | ಕನ್ನಡ | മലയാളം | తెలుగు | ગુજરાતી | বাংলা | ଓଡ଼ିଆ | ਗੁਰਮੁਖੀ | |
| |
| |
ନାରାଯଣଂ ନମସ୍କୃତ୍ଯ ନରଂ ଚୈଵ ନରୋତ୍ତମମ୍।
ଦେଵୀଂ ସରସ୍ଵତୀଂ ଵ୍ଯାସଂ ତତୋ ଜଯମୁଦୀରଯେତ୍॥SB 1.2.4॥ |
| |
| |
ଶୃଣ୍ଵତାଂ ସ୍ଵକଥାଃ କୃଷ୍ଣଃ ପୁଣ୍ଯଶ୍ରଵଣକୀର୍ତନଃ।
ହୃଦ୍ଯନ୍ତଃ ସ୍ଥୋ ହ୍ଯଭଦ୍ରାଣି ଵିଧୁନୋତି ସୁହୃତ୍ସତାମ୍॥SB 1.2.17॥ |
| |
| |
ନଷ୍ଟପ୍ରାଯେଷ୍ଵଭଦ୍ରେଷୁ ନିତ୍ଯଂ ଭାଗଵତସେଵଯା।
ଭଗଵତ୍ଯୁତ୍ତମଶ୍ଲୋକେ ଭକ୍ତିର୍ଭଵତି ନୈଷ୍ଠିକୀ॥SB 1.2.18॥ |
| |
| |
| |
| हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ |
| |
| |
|