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गुरुदेव! कबे मोर सेइ दिन Hindi Srila Bhaktivinoda Thakura Shrila Bhaktivinoda Thakura 1 gurudev kabe mora sei din ha be mana sthira kori nirjane bosiya krsna nama ga bo jabe samsara phukara kane na posibe deho roga dure ro be 2 har वैष्णव आचार्यों के गीत एवं भजन | Bhajan & Aarti of Vaishnav Acharyas ISKCON songs
 
वैष्णव भजन  »  गुरुदेव! कबे मोर सेइ दिन
 
 
गुरुदेव! कबे मोर सेइ दिन 
श्रील भक्तिविनोद ठाकुर       
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गुरुदेव!
कबे मोर सेइ दिन ह’बे?
मन स्थिर करि’, निर्जने बसिया,
कृष्णनाम गा’ब यबे।
संसार-फुकार, काने ना पशिबे,
देह-रोग दूरे र’बे॥1॥
 
 
‘हरे कृष्ण’ बलि’, गाइते गाइते,
नयने बहिबे लोर।
देहेते पुलक, उदित हइबे,
प्रेमेते करिबे भोर॥2॥
 
 
गद्‌-गद्‌ वाणी, मुखे बाहिरिबे,
काँपिबे शरीर मम।
घर्म मुहुर्मुहू, विवर्ण हइबे,
स्तम्भित प्रलय सम॥3॥
 
 
निष्कपटे हेन, दशा कबे ह’बे,
निरन्तर नाम गा’ब।
आवेशे रहिया, देह-यात्रा करि’,
तोमार करुणा पा’ब॥4॥
 
 
शब्दार्थ
(1) हे गुरुदेव! वह दिन कब आएगा जब मैं एकांत स्थान पर बैठकर, स्थिर मन से कृष्ण के पवित्र नाम का जप करने में समर्थ हो सकूँगा? इस भौतिक जगत्‌ के वार्तालाप मेरे कानों में प्रवेश तक नहीं कर पाएँगे। मेरा शरीर किसी भी वयाधि से ग्रस्त नहीं होगा।
 
 
(2) मैं हरे कृष्ण महामंत्र का जप और कीर्तन कर सकूँगा तथा मेरी आँखों से अश्रुधारा बहेगी, मेरा शरीर पुलकित हो उठेगा (शरीर के रोम खड़े हो जाएँगे) तथा मैं प्रेमोन्माद में पूर्णतया निमग्न हो जाऊँगा।
 
 
(3) उस समय, मेरा कण्ठ अवरुद्ध हो जाएगा तथा एक ही साथ मेरा शरीर कंपित होकर उससे पसीना बहेगा। मेरी काया पीतवर्णी हो उठेगी तथा अन्ततोगत्वा मैं अचेत हो जाऊँगा।
 
 
(4) इस प्रकार की गौरवमयी अवस्था मैं कब प्राप्त करूँगा? मैं निरंतर आपके पवित्र नाम का जप करूँगा तथा प्रेमोन्माद में निमग्न रहते हुए, अपने शारीरिक कार्यकलाप करूँगा। इस प्रकार से मैं आपकी कृपा प्राप्त करूँगा।
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥