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in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/vb/vbsong.php on line 53 रमणि-शिरोमणि Hindi Srila Bhaktivinoda Thakura Shrila Bhaktivinoda Thakura 1 ramani siromani brsabhanu nandini nila vasana paridhana chinna purata jini varna vikasini baddha kabari hari prana 2 abharana mandita hari rasa वैष्णव आचार्यों के गीत एवं भजन | Bhajan & Aarti of Vaishnav Acharyas ISKCON songs
(1) वृषभानु की पुत्री सभी तरुणीयों में शिरोमणि अर्थात् श्रेष्ठ रत्न हैं। वे नीले रंग के वस्त्र धारण करती हैं। उनकी शारीरिक कान्ति ताजे या नवीन स्वर्ण के सौन्दर्य को परास्त कर देती है। उनके बाल बहुत सुन्दर वेणी में बँधे हैं। वे हरि की प्राण-आधार हैं।
(2) वे आभूषणों से अलंकृत हैं। वे श्रृंगार रस की पूर्ण क्रीड़ाओं के विज्ञान में कुशल विद्वान पंडित हैं। उनका मस्तक तिलक से सुशोभित है। उनका वक्षस्थल, गहनों से मंडित या सुसज्जित चोली से ढका है। वे अपने नेत्र काले रंग के काजल से सजाती हैं। वे कृष्ण के प्रति प्रेम से पूर्ण सरोबार है।
(3) अन्य सभी कुछ त्यागते हुए श्रीराधा के चरण कमलों में आश्रय स्वीकार करो। राधाजी की दासी बनो और प्रेम, निष्ठा सहित उनकी आराधना करो।
(4) उनका तेज चमकता सौंदर्य देखकर, रति देवी, गौरी व लीला देवी भी अपने अभिमान का परित्याग कर देती हैं।
(5) शची देवी, लक्ष्मी देवी एवं सत्या देवी का सौभाग्य, श्रीमती राधारानी के चरणकमलों की उपस्थिति में, पूर्ण रूप से परास्त हो जाता हैं।
(6) प्रतिद्वंद्वी गोपियाँ चन्द्रावली के नेतृत्व में, श्री राधा जी के समक्ष पराजय स्वीकार करने के लिए बाध्य की जाती हैं, क्योंकि श्रीमती राधारानी अकेले ही कृष्ण को वश में कर लेती हैं। इसके कारण प्रतिद्वंद्वी गोपियाँ झगड़ालू हो जाती हैं।
(7) श्रील भक्तिविनोद ठाकुर, जो गोद्रुम में निवास करते हैं, भगवान् की अत्यन्त प्रिय श्री राधाजी के चरण कमलों को प्राप्त करने की आकांक्षा करते हैं।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥