|
| |
| |
രാധാ-കുംഡ-തട  |
| ശ്രീല ഭക്തിവിനോദ ഠാകുര |
| भाषा: हिन्दी | English | தமிழ் | ಕನ್ನಡ | മലയാളം | తెలుగు | ગુજરાતી | বাংলা | ଓଡ଼ିଆ | ਗੁਰਮੁਖੀ | |
| |
| |
രാധാ-കുംഡ-തട-കുംജ-കുടീര।
ഗോവര്ധന-പര്വത, യാമുന-തീര॥1॥ |
| |
| |
കുസുമ-സരോവര, മാനസ-ഗംഗാ।
കലിന്ദ-നന്ദിനീ വിപുല-തരംഗാ॥2॥ |
| |
| |
വംശീ-വട, ഗോകുല, ധീര-സമീര।
വൃന്ദാവന-തരു-ലതികാ-ബാനീര। ॥3॥ |
| |
| |
ഖഗ-മൃഗ-കുല, മലയ-ബാതാസ।
മയൂര, ഭ്രമര, മുരലീ, വിലാസ॥4॥ |
| |
| |
വേണു, ശൃംഗ, പദ-ചിന്ഹ മേഘമാലാ।
വസന്ത, ശശാംക, ശംഖ, കരതാലാ॥5॥ |
| |
| |
യുഗല-വിലാസേ അനുകൂല ജാനി।
ലീലാ-വിലാസ ഉദ്ദീപക മാനി॥6॥ |
| |
| |
ഏ-സബ ഛോड़ത കഹി നാഹി യാഉഁ।
ഏ-സബ ഛോड़ത പരാണ ഹാരാഉഁ॥7॥ |
| |
| |
ഭകതിവിനോദ കഹേ, ശുന കാന!
തുയാ ഉദ്ദീപക ഹാമാരാ പരാണ॥8॥ |
| |
| |
| |
| हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ |
| |
| |
|