તોમાર ચરણ, બિના કિછુ ધન,
સંસારે ના આછે આર।
ભકતિવિનોદ, જડ઼-વિદ્યા છાડ઼િ,’
તુયા પદ કરે સાર॥6॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥