ছাডি’ দম্ভ অনুক্ষণ, স্মর অষ্টতত্ত্ব মন,
কর তাহে নিষ্কপটে রতি
সেই রতি প্রার্থনায, শ্রীদাস গোস্বামী পায,
এ ভক্তিবিনোদ করে নতি॥4॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥