वैष्णव भजन  »  कबे श्री चैतन्य मोरे
 
 
श्रील भक्तिविनोद ठाकुर       
भाषा: हिन्दी | English | தமிழ் | ಕನ್ನಡ | മലയാളം | తెలుగు | ગુજરાતી | বাংলা | ଓଡ଼ିଆ | ਗੁਰਮੁਖੀ |
 
 
कबे श्री चैतन्य मोरे-करिबेन दया।
कबे आमि पाइब वैष्णवपद-छाया॥1॥
 
 
कबे आमि छाड़िब ए विषयाभिमान।
कबे विष्णुजने आमि करिब सम्मान॥2॥
 
 
गलवस्त्र कृतांजलि वैष्णव निकटे।
दन्ते तृण करि’ दाड़ाइब निष्कपटे॥3॥
 
 
काँदिया-काँदिया जनाइब दुःख-ग्राम।
संसार-अनल हइते मागिब विश्राम॥4॥
 
 
शुनिया आमार दुःख वैष्णव ठाकुर।
आमा लागि’ कृष्णे आवेदिबेन प्रचुर॥5॥
 
 
वैष्णवेर आवेदने कृष्ण दयामय।
ए-हेन पामरप्रति ह’बेन सदय॥6॥
 
 
विनोदेर निवेदन वैष्णव-चरणे।
कृपा करि’ संगे लह एइ अंकिचने॥। 7॥
 
 
(1) कब श्री चैतन्य महाप्रभु मुझ पर कृपा करेंगे जिससे कि मैं वैष्णवों के चरणकमलों की छाया प्राप्त कर सकूँगा?
 
 
(2) कब मैं भौतिक विषय वासनाओं का अभिमान त्यागूँगा? कब मैं भगवान्‌ विष्णु के भक्तों को सम्मान प्रकट करने में समर्थ बन पाऊँगा?
 
 
(3) जब भी वैष्णव का दर्शन करूँगा, मैं अपनी गर्दन के ईद-गिर्द वस्त्र लपे. टकर, दाँतों के मध्य तिनका रखकर तथा हाथों को जोड़कर, निष्कपट भाव से उनके समक्ष खड़ा हो जाऊँगा।
 
 
(4) रोते-रोते, मैं उनसे अपने दुःखी जीवन की वयथा-कथा कहूँगा तथा मैं उनसे प्रार्थना करूँगा कि वे मुझे भौतिक जीवन की अग्नि से विश्राम प्रदान करें।
 
 
(5) मेरे जीवन का दुःख श्रवण के पश्चात्‌ दयालु वैष्णव ठाकुर भगवान्‌ कृष्ण से मेरे कल्याण की प्रार्थना करेंगे।
 
 
(6) वैष्णवों की प्रार्थना सुनने के पश्चात्‌ परम दयालु कृष्ण इस अतिशय पापी वयक्ति पर करुणा करेंगे।
 
 
(7) श्रील भक्तिविनोद ठाकुर वैष्णवों के चरणकमलों पर यह निवदेन करते हैंः ‘‘कृपया इस भिक्षुक को अपना संग दीजिए। ’’
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
 
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd