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శ్రీల జగన్నాథ ప్రణతి  |
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గౌరావిర్భావ-భూమేస్త్వం నిర్దేష్టా సజ్జన-ప్రియః।
వైష్ణవ-సార్వభౌమః శ్రీజగన్నాథాయ తే నమః॥ |
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| हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ |
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