नान्तोऽस्ति यस्य न च यस्य समुद्भवोऽस्ति
वृद्धिर्न यस्य परिणामविवर्जितस्य।
नापक्षयं च समुपैत्यविकारि वस्तु
यस्तं नतोऽस्मि पुरुषोत्तममीशमीडॺम्॥ ६०॥
अनुवाद
मैं उन स्तुतियोग्य भगवान पुरुषोत्तम को नमस्कार करता हूँ, जो निष्फल हैं, जिनका न आदि है, न अन्त है, न वृद्धि है और न क्षय है तथा जो नित्य निर्विकार हैं ॥60॥
I bow to that praiseworthy Lord Purushottama, who is without any result and who has no beginning, no end, no growth and no decay and who is eternally without any change. ॥ 60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥