श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  6.8.55 
यस्त्वेतत्सकलं शृणोति पुरुष:
कृत्वा मनस्यच्युतं
सर्वं सर्वमयं समस्तजगता-
माधारमात्माश्रयम्।
ज्ञानज्ञेयमनादिमन्तरहितं
सर्वामराणां हितं
स प्राप्नोति न संशयोऽस्त्यविकलं
यद्वाजिमेधे फलम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सम्पूर्ण जगत् के आधार, आत्मा के आश्रय, सबका स्वरूप, सर्वव्यापी ज्ञान और ज्ञेय आदि स्वरूप, अनन्त और सम्पूर्ण देवताओं के हितकारी भगवान विष्णु का ध्यान करके इस सम्पूर्ण पुराण को सुनता है, वह निःसंदेह अश्वमेध यज्ञ का समग्र फल प्राप्त करता है ॥55॥
 
The man who listens to this entire Purana by meditating on Lord Vishnu, who is the basis of the entire world, the support of the soul, the form of everything, the omnipresent knowledge and the form of the knowable etc., the endless one and the benefactor of all the gods, he undoubtedly gets the overall results of Ashwamedha Yagya. 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)