श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.8.54 
कपिलादानजनितं पुण्यमत्यन्तदुर्लभम्।
श्रुत्वैतस्य दशाध्यायानवाप्नोति न संशय:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
इसके दस अध्यायों को सुनने से मनुष्य को निःसंदेह कपिला गौ दान का अत्यंत दुर्लभ पुण्य फल प्राप्त होता है ॥54॥
 
By listening to its ten chapters, one undoubtedly gets the very rare virtuous result of donating the Kapila cow. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)