श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.8.52 
इत्येतत्परमं गुह्यं कलिकल्मषनाशनम्।
य: शृणोति नरो भक्त्या सर्वपापै: प्रमुच्यते॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य कलियुग के पापों का नाश करने वाले इस परम गोपनीय पुराण को भक्तिपूर्वक सुनता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है ॥ 52॥
 
He who listens with devotion to this extremely secret Purana which destroys the evils of Kaliyuga, becomes free from all sins. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)