श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.8.44 
भागुरि: स्तम्भमित्राय दधीचाय स चोक्तवान्।
सारस्वताय तेनोक्तं भृगुस्सारस्वतेन च॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तब भागुरि ने स्तंभमित्र को, स्तंभमित्र ने दधीचि को, दधीचि ने सारस्वत को और सारस्वत ने भृगु को सुनाया। 44॥
 
Then Bhaguri narrated it to Stambhamitra, Stambhamitra to Dadhichi, Dadhichi to Saraswat and Saraswat to Bhrigu. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)