श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.8.42 
दु:स्वप्ननाशनं नॄणां सर्वदुष्टनिबर्हणम्।
मङ्गलं मङ्गलानां च पुत्रसम्पत्प्रदायकम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वे मनुष्यों के दुःस्वप्नों का नाश करने वाले, समस्त दोषों को दूर करने वाले, शुभ वस्तुओं में परम शुभ हैं तथा सन्तान और सम्पत्ति देने वाले हैं ॥42॥
 
He is the one who destroys the nightmares of humans, removes all the defects, is the most auspicious among the auspicious things and is the giver of children and property. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)