श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  6.8.39-40 
तस्मिन्काले समभ्यर्च्य तत्र कृष्णं समाहित:।
दत्त्वा पिण्डं पितृभ्यश्च यमुनासलिलाप्लुत:॥ ३९॥
यदाप्नोति नर: पुण्यं तारयन्स्वपितामहान्।
श्रुत्वाध्यायं तदाप्नोति पुराणस्यास्य भक्तित:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उस समय यमुना के जल में स्नान करके, भगवान् का ध्यानपूर्वक पूजन करके तथा अपने पितरों को पिंडदान करके, अपने पितरों का उद्धार करके मनुष्य को जो पुण्य प्राप्त होता है, वही पुण्य इस पुराण के एक अध्याय को भक्तिपूर्वक सुनने से प्राप्त होता है॥ 39-40॥
 
At that time, the same virtue that a person gets by bathing in the water of the Yamuna, worshipping the Lord carefully and offering Pinds to his forefathers, saving his forefathers, can be obtained by listening to one chapter of this Purana with devotion.॥ 39-40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)