श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.8.29 
प्रयागे पुष्करे चैव कुरुक्षेत्रे तथार्णवे।
कृतोपवास: प्राप्नोति तदस्य श्रवणान्नर:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
प्रयाग, पुष्कर, कुरुक्षेत्र और समुद्रतट पर व्रत करने से जो फल मिलता है, वही इस पुराण के श्रवण से प्राप्त होता है ॥29॥
 
The same benefits that one gets by fasting at Prayag, Pushkar, Kurukshetra and on the seashore can be obtained by listening to this Purana. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)