श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.8.28 
यदश्वमेधावभृथे स्नात: प्राप्नोति वै फलम्।
मानवस्तदवाप्नोति श्रुत्वैतन्मुनिसत्तम॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे मुनिसतम! इसे सुनने से मनुष्य को वही फल प्राप्त होता है जो अश्वमेध यज्ञ में अवभृत (यज्ञ) में स्नान करने से मिलता है ॥28॥
 
Hey Munisatam! A person gets the same result by listening to this as he gets by taking bath in Avabhrit (Yajyant) in Ashwamedha Yagya. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)