श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.8.21 
कलिकल्मषमत्युग्रं नरकार्तिप्रदं नृणाम्।
प्रयाति विलयं सद्य: सकृद्यत्र च संस्मृते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उनका एक बार भी स्मरण करने से कलियुग का वह घोर पाप, जो मनुष्यों को नरक जैसी यातनाओं में डालता है, तुरन्त नष्ट हो जाता है ॥ 21॥
 
By remembering Him even once, the most severe sin of Kaliyuga which sends men into hell-like tortures is instantly destroyed. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)