श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.8.20 
यन्नामकीर्तनं भक्त्या विलायनमनुत्तमम्।
मैत्रेयाशेषपापानां धातूनामिव पावक:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! भक्तिपूर्वक उनका नाम जपना उस अग्नि के समान है जो सब धातुओं को पिघला देती है और समस्त पापों का नाश करने वाली है।
 
O Maitreya! Chanting of His name with devotion is like the fire that melts all metals and is the best destroyer of all sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)