श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.8.2 
सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशमन्वन्तराणि च।
वंशानुचरितं चैव भवतो गदितं मया॥ २॥
 
 
अनुवाद
मैंने तुमसे जगत् की उत्पत्ति, प्रलय, वंश, मन्वन्तर और वंश के चरित्रों का वर्णन किया॥2॥
 
I described to you the origin of the world, destruction, descent, manvantar and the characters of the descendants. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)