श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  6.7.98 
खाण्डिक्य उवाच
कथिते योगसद्भावे सर्वमेव कृतं मम।
तवोपदेशेनाशेषो नष्टश्चित्तमलो यत:॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
खाण्डिक्य बोले - "इस महान योग का वर्णन करके आपने मेरे सारे कार्य सिद्ध कर दिए हैं, क्योंकि आपके उपदेश से मेरे मन के सारे कल्मष नष्ट हो गए हैं।" ॥98॥
 
Khandikya said, "By describing this great Yoga to me you have accomplished all my tasks, because by your teachings all the impurities of my mind have been destroyed." ॥98॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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