| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 92 |
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| | | | श्लोक 6.7.92  | तस्यैव कल्पनाहीनं स्वरूपग्रहणं हि यत्।
मनसा ध्याननिष्पाद्यं समाधि: सोऽभिधीयते॥ ९२॥ | | | | | | अनुवाद | | ध्यान के जिस विषय को मन द्वारा अचिन्त्य रूप में (ध्यानकर्ता, ध्यान के विषय और ध्यान के विषय के भेद से रहित) ध्यान द्वारा प्राप्त किया जाता है, उसे समाधि कहते हैं ॥92॥ | | | | The object of meditation which is attained through meditation by the mind in an unimaginative form (devoid of the difference between the meditator, object of meditation and the subject of meditation) is called samadhi. ॥92॥ | | ✨ ai-generated | | |
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