तदेकावयवं देवं चेतसा हि पुनर्बुध:।
कुर्यात्ततोऽवयविनि प्रणिधानपरो भवेत्॥ ९०॥
अनुवाद
तत्पश्चात् ज्ञानी पुरुष को चाहिए कि वह अपने मन में एक (प्रधान) अवयव-विशेष भगवान् का गहन चिन्तन करे और फिर समस्त अवयवों को छोड़कर केवल अवयव का ही ध्यान करे ॥90॥
Thereafter, a knowledgeable person should think deeply about one (principal) component-specific God in his mind and then, leaving aside all the components, he should meditate only on the component. 90॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥