| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 88 |
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| | | | श्लोक 6.7.88  | तत: शङ्खगदाचक्रशार्ङ्गादिरहितं बुध:।
चिन्तयेद्भगवद्रूपं प्रशान्तं साक्षसूत्रकम्॥ ८८॥ | | | | | | अनुवाद | | ऐसा सिद्ध हो जाने पर बुद्धिमान् पुरुष को चाहिए कि वह शंख, चक्र, गदा, शूल आदि से रहित, स्फटिक और यज्ञोपवीत धारण किए हुए भगवान् के शान्त स्वरूप का ध्यान करे ॥88॥ | | | | Once this is established, an intelligent person should contemplate on the peaceful form of God devoid of conch, disc, mace, spear etc., wearing crystal beads and Yajnopa beads. 88॥ | | ✨ ai-generated | | |
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