| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 77 |
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| | | | श्लोक 6.7.77  | अन्ये तु पुरुषव्याघ्र चेतसो ये व्यपाश्रया:।
अशुद्धास्ते समस्तास्तु देवाद्या: कर्मयोनय:॥ ७७॥ | | | | | | अनुवाद | | इसके अतिरिक्त जो अन्य देवता तथा अन्य कर्मरूप मन के आश्रय हैं, वे सब अशुद्ध हैं ॥ 77॥ | | | | Besides this, the other deities and other forms of action which are the support of the mind are all impure. ॥ 77॥ | | ✨ ai-generated | | |
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