| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 74 |
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| | | | श्लोक 6.7.74  | यथाग्निरुद्धतशिख: कक्षं दहति सानिल:।
तथा चित्तस्थितो विष्णुर्योगिनां सर्वकिल्बिषम्॥ ७४॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे अग्नि वायु के साथ मिलकर ऊँची लपटों से युक्त होकर सूखी घास को जला देती है, वैसे ही मन में स्थित भगवान विष्णु योगियों के समस्त पापों का नाश कर देते हैं ॥74॥ | | | | Just as fire along with air, mixed with high flames, burns dry grass, similarly Lord Vishnu situated in the mind destroys all the sins of the yogis. 74॥ | | ✨ ai-generated | | |
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