श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  6.7.65 
पतत्त्रिभ्यो मृगास्तेभ्यस्तच्छक्त्या पशवोऽधिका:।
पशुभ्यो मनु जाश्चातिशक्त्या पुंस: प्रभाविता:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
वह शक्ति पक्षियों की अपेक्षा मृगों में अधिक है और मृगों की अपेक्षा पशुओं में अधिक है। तथा पशुओं की अपेक्षा मनुष्य भगवान की उस (क्षेत्रज्ञ) शक्ति से अधिक प्रभावित होते हैं ॥ 65॥
 
That power is more in deer than in birds and more in animals than in deer. And human beings are more influenced by that (Kshetragya) power of the Lord than animals. ॥ 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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