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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय
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श्लोक 31
श्लोक
6.7.31
आत्मप्रयत्नसापेक्षा विशिष्टा या मनोगति:।
तस्या ब्रह्मणि संयोगो योग इत्यभिधीयते॥ ३१॥
अनुवाद
आत्मज्ञान के लिए प्रयत्नशील तथा यम, नियम आदि की अपेक्षा रखने वाले मन की विशेष गति का ब्रह्म के साथ संयोग 'योग' कहलाता है ॥31॥
The union of the special movement of the mind with Brahma, which is striving for self-knowledge and expects Yama, Niyama etc., is called 'Yoga'. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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