श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.7.28 
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयो:।
बन्धाय विषयासङ्गि मुक्त्यै निर्विषयं मन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है; विषयों का संग करने से वह बंधनकारक हो जाता है और विषयों से रहित होने से वह मुक्तिकारक हो जाता है॥28॥
 
The mind alone is the cause of man's bondage and liberation; by associating with sense-objects it becomes binding and by being devoid of sense-objects it becomes liberating.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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