श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.7.27 
केशिध्वज उवाच
योगस्वरूपं खाण्डिक्य श्रूयतां गदतो मम।
यत्र स्थितो न च्यवते प्राप्य ब्रह्मलयं मुनि:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
केशिध्वज बोले, 'हे खाण्डिक्य! मैं उस योग का वर्णन कर रहा हूँ, जिसमें ब्रह्म में लीन हुए ऋषिगण अपने स्वरूप को नहीं खोते। कृपया इसे सुनिए।'
 
Kesidhwaj said, 'O Khandikya! I am describing the Yoga in which the sages, absorbed in Brahman, do not lose their true nature. Please listen to it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)