| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 17 |
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| | | | श्लोक 6.7.17  | मृण्मयं हि यथा गेहं लिप्यते वै मृदम्भसा।
पार्थिवोऽयं तथा देहो मृदम्ब्वालेपनस्थित:॥ १७॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे मिट्टी का घर जल और मिट्टी से लीपा जाता है, वैसे ही यह पार्थिव शरीर भी मिट्टी (मिट्टी का अन्न) और जल की सहायता से स्थिर रहता है ॥17॥ | | | | Just as a mud house is plastered with water and mud, similarly this earthly body also remains stable with the help of clay (clay food) and water. ॥ 17॥ | | ✨ ai-generated | | |
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