मृण्मयं हि यथा गेहं लिप्यते वै मृदम्भसा।
पार्थिवोऽयं तथा देहो मृदम्ब्वालेपनस्थित:॥ १७॥
अनुवाद
जैसे मिट्टी का घर जल और मिट्टी से लीपा जाता है, वैसे ही यह पार्थिव शरीर भी मिट्टी (मिट्टी का अन्न) और जल की सहायता से स्थिर रहता है ॥17॥
Just as a mud house is plastered with water and mud, similarly this earthly body also remains stable with the help of clay (clay food) and water. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥