| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 102 |
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| | | | श्लोक 6.7.102  | श्रीपराशर उवाच
यथार्हं पूजया तेन खाण्डिक्येन स पूजित:।
आजगाम पुरं ब्रह्मंस्तत: केशिध्वजो नृप:॥ १०२॥ | | | | | | अनुवाद | | श्री पराशरजी बोले - हे ब्राह्मण! तत्पश्चात खाण्डिक्यजी द्वारा विधिपूर्वक पूजन करके राजा केशिध्वज अपने नगर को लौट गये ॥102॥ | | | | Shri Parasharji said – O Brahmin! After that, after being properly worshiped by Khandikya, King Keshidhwaj returned to his city. 102॥ | | ✨ ai-generated | | |
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