श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  6.5.85 
तेजोबलैश्वर्यमहावबोध-
सुवीर्यशक्त्यादिगुणैकराशि:।
पर: पराणां सकला न यत्र
क्लेशादयस्सन्ति परावरेशे॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
वह तेज, बल, ऐश्वर्य, महाविद्या, वीर्य और बल आदि गुणों की ही राशि है, वह प्रकृति आदि से परे है और उस परमेश्वर में अज्ञान आदि समस्त क्लेश सर्वथा नष्ट हो जाते हैं ॥85॥
 
He is the only amount of qualities like brightness, strength, opulence, great science, semen and power etc., he is beyond nature etc. and in that Supreme God, all the troubles of ignorance etc. are completely eliminated. 85॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd