श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  6.5.81 
खाण्डिक्यजनकायाह पृष्ट: केशिध्वज: पुरा।
नामव्याख्यामनन्तस्य वासुदेवस्य तत्त्वत:॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में खाण्डिक्य जनक के पूछने पर केशिध्वज ने उन्हें भगवान अनन्त के 'वासुदेव' नाम का यथार्थ भाष्य इस प्रकार बताया था ॥81॥
 
In earlier times, when asked by Khandikya Janak, Keshidhwaj gave him the correct explanation of Lord Anant's name 'Vasudev' as follows. 81॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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