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श्लोक 6.5.81  |
खाण्डिक्यजनकायाह पृष्ट: केशिध्वज: पुरा।
नामव्याख्यामनन्तस्य वासुदेवस्य तत्त्वत:॥ ८१॥ |
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| अनुवाद |
| पूर्वकाल में खाण्डिक्य जनक के पूछने पर केशिध्वज ने उन्हें भगवान अनन्त के 'वासुदेव' नाम का यथार्थ भाष्य इस प्रकार बताया था ॥81॥ |
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| In earlier times, when asked by Khandikya Janak, Keshidhwaj gave him the correct explanation of Lord Anant's name 'Vasudev' as follows. 81॥ |
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