श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  6.5.79 
ज्ञानशक्तिबलैश्वर्यवीर्यतेजांस्यशेषत:।
भगवच्छब्दवाच्यानि विना हेयैर्गुणादिभि:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
त्यागने योग्य तीन गुणों (तथा उनके क्लेशों) आदि को छोड़कर केवल ज्ञान, बल, बल, तेज, वीर्य और तेज आदि गुणों का ही 'भागवत' शब्द से निरूपण होता है ॥79॥
 
Apart from the three qualities worth renouncing [and their tribulations] etc., only the virtues like knowledge, power, strength, majesty, semen and brilliance etc. are referred to by the word 'Bhagwat'. 79॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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