श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  6.5.75 
वसन्ति तत्र भूतानि भूतात्मन्यखिलात्मनि।
स च भूतेष्वशेषेषु वकारार्थस्ततोऽव्यय:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
उस सर्वव्यापी आत्मा में ही सब प्राणी निवास करते हैं और वह स्वयं भी सब प्राणियों में निवास करता है। अतः वह अविनाशी (परमेश्वर) ही 'व' अक्षर का अर्थ है। 75.
 
All beings reside in that all-pervading Self and He Himself also resides in all beings. Hence, that indestructible (God) is the meaning of the letter 'V'. 75.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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