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श्लोक 6.5.75  |
वसन्ति तत्र भूतानि भूतात्मन्यखिलात्मनि।
स च भूतेष्वशेषेषु वकारार्थस्ततोऽव्यय:॥ ७५॥ |
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| अनुवाद |
| उस सर्वव्यापी आत्मा में ही सब प्राणी निवास करते हैं और वह स्वयं भी सब प्राणियों में निवास करता है। अतः वह अविनाशी (परमेश्वर) ही 'व' अक्षर का अर्थ है। 75. |
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| All beings reside in that all-pervading Self and He Himself also resides in all beings. Hence, that indestructible (God) is the meaning of the letter 'V'. 75. |
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