श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  6.5.72 
शुद्धे महाविभूत्याख्ये परे ब्रह्मणि शब्द्यते।
मैत्रेय भगवच्छब्दस्सर्वकारणकारणे॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! सर्व कारणों से 'भागवत' शब्द भगवान् के लिए ही प्रयुक्त हुआ है ॥72॥
 
O Maitreya! Due to all the reasons, the word 'Bhagwat' has been used only for the Supreme Personality of Godhead. 72॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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