श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  6.5.70 
एवं निगदितार्थस्य तत्तत्त्वं तस्य तत्त्वत:।
ज्ञायते येन तज्ज्ञानं परमन्यत्त्रयीमयम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
जिस भगवान् का स्वरूप बताया गया है, उसका सार, जिससे वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है, वह परमज्ञान (परा विद्या) है। त्रयीमय ज्ञान (अनुष्ठान) इससे (अपरा विद्या) भिन्न है। 70॥
 
The essence of God whose form has been described through which real knowledge is attained is Param Gyan (Para Vidya). Trayimaya knowledge (rituals) is separate from this (apara vidya). 70॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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