श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.5.7 
मृगपक्षिमनुष्याद्यै: पिशाचोरगराक्षसै:।
सरीसृपाद्यैश्च नृणां जायते चाधिभौतिक:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मृग, पक्षी, मनुष्य, भूत, सर्प, पिशाच और सरीसृप (बिच्छू) आदि से मनुष्य को जो कष्ट प्राप्त होता है, उसे शारीरिक कहते हैं ॥7॥
 
The suffering that a human being receives from deer, birds, humans, ghosts, snakes, devils and reptiles (scorpions) etc. is called physical. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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