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श्लोक 6.5.69  |
तदेव भगवद्वाच्यं स्वरूपं परमात्मन:।
वाचको भगवच्छब्दस्तस्याद्यस्याक्षयात्मन:॥ ६९॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान् का वह रूप ही 'भागवत' शब्द का अर्थ है और भागवत शब्द ही उस आदि एवं अक्षय रूप का अर्थ है ॥69॥ |
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| That form of God itself is the meaning of the word 'Bhagwat' and the word Bhagwat itself is the meaning of that original and inexhaustible form. 69॥ |
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