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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन
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श्लोक 65
श्लोक
6.5.65
द्वे वै विद्ये वेदितव्ये इति चाथर्वणी श्रुति:।
परया त्वक्षरप्राप्तिर्ऋग्वेदादिमयापरा॥ ६५॥
अनुवाद
अथर्ववेद कहता है कि ज्ञान दो प्रकार का है - परा और अपरा। परसे अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति होती है और अपरा ऋगादि वेदत्रयी रूप है। 65॥
Atharva Veda says that there are two types of knowledge – Para and Apara. Parase Akshar Brahma is attained and Apara Rigadi is Vedatrayi form. 65॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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