श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  6.5.61 
आगमोत्थं विवेकाच्च द्विधा ज्ञानं तदुच्यते।
शब्दब्रह्मागममयं परं ब्रह्म विवेकजम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
ज्ञान दो प्रकार का है - शास्त्रसम्मत और तर्कसम्मत। शब्दब्रह्म का ज्ञान शास्त्रसम्मत है और परब्रह्म का ज्ञान विवेकज है। 61॥
 
There are two types of knowledge – scripture based and rational. The knowledge of ShabdaBrahma is derived from scriptures and the knowledge of ParaBrahma is Vivekaj. 61॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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