| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन » श्लोक 56 |
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| | | | श्लोक 6.5.56  | कलत्रपुत्रमित्रार्थगृहक्षेत्रधनादिकै:।
क्रियते न तथा भूरि सुखं पुंसां यथाऽसुखम्॥ ५६॥ | | | | | | अनुवाद | | स्त्री, पुत्र, मित्र, धन, घर, सम्पत्ति और धन से जो दुःख मिलता है, वैसा सुख पुरुषों को कहीं नहीं मिलता ॥56॥ | | | | Men do not get happiness like the sorrow they get from wife, son, friend, wealth, home, property and money. ॥ 56॥ | | ✨ ai-generated | | |
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