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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन
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श्लोक 55
श्लोक
6.5.55
यद्यत्प्रीतिकरं पुंसां वस्तु मैत्रेय जायते।
तदेव दु:खवृक्षस्य बीजत्वमुपगच्छति॥ ५५॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! मनुष्यों को जो भी प्रिय वस्तुएँ हैं, वे सब दुःखरूपी वृक्ष के बीज बन जाती हैं॥55॥
O Maitreya! All the things that are dear to humans become seeds of the tree of sorrow. ॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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