श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.5.52 
जातमात्रश्च म्रियते बालभावेऽथ यौवने।
मध्यमं वा वय: प्राप्य वार्द्धके वाथ वा मृति:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
जो जन्म लेता है, वह जन्म के समय, बाल्यावस्था में, युवावस्था में, मध्यावस्था में अथवा वृद्धावस्था में अवश्य मरता है ॥ 52॥
 
One who is born surely dies at birth, in childhood, in youth, in middle age or when he becomes old. ॥ 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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