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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन
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श्लोक 50
श्लोक
6.5.50
न केवलं द्विजश्रेष्ठ नरके दु:खपद्धति:।
स्वर्गेऽपि पातभीतस्य क्षयिष्णोर्नास्ति निर्वृति:॥ ५०॥
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! केवल नरक में ही दुःख नहीं है। स्वर्ग में भी गिरने के भय से शान्ति नहीं है। ॥50॥
O best of Brahmins! It is not only in hell that there is suffering. Even in heaven, there is no peace because of the fear of falling. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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